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Market capital के हिसाब से दो तरह के होते हैं IPOs

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हर कंपनी का सबसे important factor Market capital ही होता है। Market capital के जरिए ही हम बाजार में उस specific company की Value को समझते है। इसी मार्केट कैपिटल के हिसाब से IPO दो तरह के होते हैं- Main IPO और SME IPO

IPO- Initial public offering के बारे में हम सब जानते हैं। मगर IPO के इस तरह की Category को बहुत ही कम लोग जानते हैं।

Main IPO- ज्यादातर जिन IPOs के बारे में हम सुनते हैं, वो सभी main IPOs होते हैं। हम बड़े मार्केट कैपिटल की कंपनियों के बारे में ज्यादा जानते हैं और वो कंपनियां जब IPO लेकर आती है, तो हमें उसकी जानकारी लग जाती है। इस IPO Category की कंपनियों का मार्केट कैपिटल 25 करोड़ से ज्यादा होना जरूरी होता है।

इसके अंतर्गत आने वाले IPOs के DRHP (Draft Red Herring Prospectus) market regulator SEBI में सबमिट करना होता है। इन IPO के तहत आने वाली कंपनियों का IPO issue size भी ज्यादा होता है और इसमें आने वाली कंपनियों को अपना quarter on quarter रिपोर्ट देना होता है। इसके अंतर्गत आपके जान- पहचान की कई कंपनियां आती हैं, कुछ के नाम इस तरह हैं- Sterling & Wilson Solar Sompany, Affle India Limited.

SME IPO- Small & Medium Enterprise इस IPO category के जरिए अपने IPOs issue करती है। small & medium enterprises हमारे देश की रीढ़ है, क्योंकि हमारे यहां ज्यादातर कंपनियां small & medium enterprises की होती हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं चाहे विदेशी कंपनी हो या देशी सारी small & medium enterprises को कवर करने की कोशिश करती है। दरअसल इसकी वजह यही है कि SME indian market की जान है। इस category की कंपनियां ज्यादातर अपने आप को प्राइवेट ही रखती है, ऐसी बहुत कम ही कंपनियां होती है जो कि अपने IPO लेकर आती हैं।

इस category की कंपनियों को अपने IPO Prospectus यानि DRHP (Draft Red Herring Prospectus)  Stock Exchange में सबमिट करना होता है। इस IPO के अंतर्गत आने वाली कंपनियों का मार्केट कैपिटल 10 करोड़ से 25 करोड़ के बीच होना चाहिए और इसके अंतर्गत आने वाली कंपनियों को आधे साल का रिपोर्ट सबमिट करना होगा। इसके अंतर्गत तो इंडिया की बहुत सारी कंपनियां आती हैं, पर इसमें से कुछ ही नाम आप पहचानते होंगे। example- Wonder Fibromats Limited, Tutorials Point Limited.

इसके साथ-साथ इन type की IPOs के अंतर्गत आने वाली कंपनियों में Clause 49 लागू होता है। ये clause स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली कंपनियों के लिए जरूरी है।

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