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Shapoorji Pallonji, Tata Group से होगी बाहर: जानिए शुरू से अब तक की कहानी

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आज की इस पोस्ट में हम Shapoorji Pallonji और Tata Sons के बीच के झगड़े के बारे में वो सब कुछ बताने जा रहे है जो आपको पता होना चाहिए, हम जानेगे दशकों से चले आ रहे Business में दरार कैसे आई और end  में यह Business Deal कैसे टूटी? तो चलिए शुरू करते हैं.

झगड़ा कैसे शुरू हुआ?

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टाटा और मिस्त्री परिवार के बीच Rivalry की कहानी ऐसी नहीं है जिसके बारे में बात नहीं की गई है। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। कुछ समय पहले तक सब कुछ अच्छा था। दूरदर्शी मिस्टर रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री में बहुत कुछ देखा। उनका मानना था कि साइरस मिस्त्री के पास Great empire बनाने और उसे बनाए रखने की शक्ति और दृष्टि थी। उन्होंने खुद को साइरस मिस्त्री में देखा और इसलिए, जब 2012 में रतन टाटा 75 वर्ष के हो गए, तो उन्होंने साइरस मिस्त्री के कंधों पर अपना सारा बोझ डालने का फैसला किया। जाहिर है, यह कुछ समय की बात नहीं थी, वह चाहते थे की मिस्त्री उसी तरह Organization को Guide करे, जैसे वह खुद कई सालों से करते आ रहे थे। लेकिन 2016 में चीजें तेजी से बदल गईं जब साइरस मिस्त्री को 24 अक्टूबर 2016 को टाटा संस के बोर्ड से Chairman के पद से हटा दिया गया, यानी 2012 में कंपनी की कमान संभालने के सिर्फ 4 साल बाद ही ,मिस्त्री को हटा दिया गया।

ऐसा कहा जाता है कि मिस्त्री को रातोंरात पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, और जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो उन्हें Emergency board की Meeting के बाद निकाल दिया गया। और यहीं से सब कुछ सामने आ गया। रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच के इस झगड़े ने उन दोनों के साथ-साथ Business operations के बीच भी तनाव बढ़ा दिया। हम अच्छी तरह से जानते हैं कि कैसे टाटा अपने अंदरूनी झगड़े को बाहर नहीं आने देते लेकिन इस झगड़े ने बहुत सी चीजों को बाहर ला दिया। NTT DOCOMO Deal, UK में टाटा स्टील के Port Talbot Plant की Proposed sale  ने रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच मतभेदों को सभी के सामने ला दिया। और इस तरह झगड़ा शुरू हुआ। बहुत सारे मुकदमे हुए, जिनका समाधान होना अभी भी बाकी है। उसके बाद कई सालों के लिए सब कुछ शांत हो गया।

ज्वालामुखी में विस्फोट कैसे हुआ?

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तनाव फिर से बढ़ गया जब tata group में कथित रूप से 18.4% हिस्सेदारी रखने वाला SP Group अपनी हिस्सेदारी गिरवी रखकर Fund Collect करना चाह रही थी। मूल रूप से इसका मतलब था कि वो Canadian Investor Brookfield Asset Management को टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी गिरवी रखकर 3,750 करोड़ रुपये का Fund Collect करना चाह रहे थे।

लेकिन Pledging Share के लिए Permission लेने की जरूरत होती है, दुसरे majority shareholders और टाटा संस नहीं चाहते थे कि हिस्सेदारी में बदलाव हो। इसलिए उन्होंने SP Group को अपने Business के लिए Additional Capital के बदले में टाटा संस के किसी भी शेयर को गिरवी रखने से रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा की Tata Group नियमों के अनुसार, Share Holders बिना Permission के अपनी हिस्सेदारी नहीं बदल सकते.

हालांकि, शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप, इस Global pandemic के कारण अपने Construction Business को Support करने के लिए Fund Collect करना चाह रहा था। इसके अलावा, इस Fund से SP Group Construction Field में अपने Business को Expand करना चाहता था क्योंकि महामारी के बाद इस Field में अच्छी Growth की संभावना थी।

दोनों पक्ष अपनी जगह सही लगते हैं। लेकिन, SP Group ने आरोप लगाया है कि Tata Group ने SP Group को टाटा संस में अपने शेयरों को गिरवी रखने से रोकने की कोशिश की है, जबकि मिस्त्री परिवार अपनी निजी हिस्सेदारी बेचकर Fund Collect कर रहा था। इसलिए Tata Group को इसमें कोई परेसानी नहीं होनी चाहिए. इसलिए ये कहा जा सकता है कि दोनों पक्ष अपनी - अपनी जगह सही हैं।

अब आगे क्या होगा?

अब सवाल यह है कि टाटा संस में SP Group के शेयर कौन खरीद सकता है? और, अगर tata group  खुद ये हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रहा है, तो क्या ऐसा करना Possible  होगा?

टाटा संस के Articles of Association यानी AOA में कहा गया है कि अगर टाटा संस का कोई भी Shareholder अपने शेयरों को बेचना चाहता है, तो उसे पहले टाटा संस को ये Offer देना होगा।

SP Group के अनुसार वे शुरू से बातचीत के लिए तैयार हैं और Humble way में Tata Group से बाहर निकलने के लिए एक Best Solution तक पहुचने की कोशिस कर रहे है.

अब, Tata group ने Announce किया है की वह टाटा संस में SP Group की हिस्सेदारी खरीदेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि टाटा समूह, ये हिस्सेदारी खरीदने के लिए SP Group द्वारा determined valuation  को कैसे पूरा करता है।

Tata Group की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है, tata group  की कंपनियों के Financial Performance पर करीबी नज़र रखने से Group की Debt situation का पता चलता है। विशेष रूप से, Steel, Auto और Power Business, जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

टाटा स्टील UK के नाम से UK में Steel का Business पिछले कुछ सालो में 11,000 करोड़ रुपये  के घाटे में चल रहा है और लगातार इसका Operation घट रहा है। कुल मिलाकर, Tata Group की बड़ी Companies पिछले 3 सालो में लगभग 1 ट्रिलियन रुपये के कर्ज में हैं। Tata Consultancy Services या TCS, Group की कुछ बड़ी कंपनियों में से एक है, जो आगे रहने में कामयाब रही है और बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

फिलहाल इस कहानी को एक Temporary Stop देने के लिए, टाटा ने बयान जारी किया है कि वो SP Group की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कोई जल्दीबाजी नहीं करेगा, वैसे आपको क्या लगता है आगे क्या होगा? हमें Comment करके जरूर बताएं।

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author

Amit