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अमैजॉन और एक्जॉन को पीछे छोड़कर ऐसे बनी सऊदी अरैमको दुनिया की सबसे अमीर कंपनी...


तेल तरल सोना है, इसे नहीं खोना है...

इस लाइन को पढ़ कर आपको शायद लग रहा होगा कि यह किसी अभियान या रैली में बोली जाने वाली लाइन है, बहरहाल यह है तो एक नारा (SLOGAN) ही लेकिन यहां पर इस बात को कहने का मकसद जऱा अलग है.

आपने अभी तक अमैजॉन (AMAZON), एप्पल (APPLE), एल्फाबेट (ALPHABET), एक्जॉन मोबिल (EXXON MOBIL) और रॉयल डच शैल (ROYAL DUTCH SHELL) जैसी कंपनी और उनके मालिकों की सफलता के किस्से तो जरूर सुने होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि एक कंपनी ऐसी भी है जिसकी कमाई इन सभी कंपनियों की कमाई से कहीं ज्यादा है? और यह कंपनी दुनिया की सबसे अमीर कंपनी है?

सोचने वाली बात है कि आखिर कैसे कोई देश दुनिया का सबसे कमाई करने वाला देश बन सकता है और उसके बारे में किसी को ज्यादा जानकारी भी नहीं है...

विश्व को अचम्भित कर सऊदी अरब की तेल और गैस कंपनी सऊदी अरैमको ने सबसे अमीर कंपनी बनने का तगमा अपने नाम किया है...

ऐसे हुई तेल से तरल सोना बनने की शुरूआत

हर सफलता कि एक कहानी होती है, किस्सा होता है और मुकाम पर पहुंचने की चाह होती है. सऊदी अरैमको की शुरूआत भी ऐसे ही हुई. सन 1933 में सऊदी सरकार ने कैरेबियन कैलिफोर्निया डिच ऑइल कंपनी को एक कॉन्ट्रेक्ट के तहत तेल की खोज के लिए अनुमति दी. इस डील में कंपनी को अधिकार था कि वह सऊदी अरब की सीमा में तेल की खोज कर सकती है. इसके बाद टैक्सेस ऑयल कंपनी (TEXOS OIL CO.) ने इसमें 50 प्रतिशक की हिस्सेदारी इसमें खरीदी. शुरूआत में इन कंपनियों को किसी भी तरह की सफलता हासिल नहीं हुई लेकिन 1936 में जब सातवी बार ड्रिल किया गया तो इस क्षेत्र के धरन नाम के इलाके से तेल की खोज संभव हो पाई. सालो तक शेवरोन (chevron), टैक्सोको (TEXOCO) और एक्जॉन मोबिल ( EXON MOBIL) जैसी कंपनियों ने सऊदी से तेल उत्पादन (OIL PRODUCING) का व्यापार किया. शुरूआत में इसका नाम कैलिफोर्निया अरेबियन स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी था बाद में सन 1944 में कंपनी का नाम कैलिफोर्निया अरेबियन स्टैंडर्ड ऑयल से बदलकर अरेबियन अमेरिकन ऑयल कंपनी यानि अरैमको हो गया.

समय बदला तो सभी देशों ने अपने देश के संसाधनों (RESOURCES) का राष्ट्रीयकरण (NATIONALIZATION) करना शुरू कर दिया. राष्ट्रीयकरण की बातों को ध्यान में रखते हुए ही सऊदी सरकार ने भी 1973 में अरैमको के 25% हिस्से को खरीद लिया. इसी साल में ही खरीदारी का यह हिस्सा 60%  हो गया और सन 1980 में सऊदी सरकार ने अपनी इस हिस्सेदारी का दायरा 100% कर लिया.

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अब तक नहीं थी किसी को कंपनी की कमाई की जानकारी

सन 1982 से सऊदी सरकार ने अरैमको के तेल भंडार के फिल्ड को लेकर होने वाली जानकारी को गोपनीय बनाया हुआ है. यहां तक की अरैमको किसी भी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिड भी नहीं है. इसलिए ही इसकी कमाई और तेल भंडार की जानकारी किसी को नहीं है लेकिन साल 2018 में सऊदी सरकार ने अरैमको की कमाई के रहस्य से जब पर्दा उठाया तो मालूम हुआ कि यह विश्व की सबसे बड़ी और अमीर कंपनी है. अरैमको हर रोज़ 10 मिलियन बैरल तेल उत्पाद (PRODUCE) करती है. यह सभी बातें तो रही तेल के क्षेत्र की, अरैमको ऑयल पंपिंग के अलावा क्रुड ऑयल को रिफाइन कर गैस और दूसरे कैमिकल भी बेचकर लाभ कमाती है.

अरैमको का साल 2018 का मुनाफा एक सौ ग्यारह (111) अरब ड़ालर का रहा है. तुलनात्मक नज़रिये से अगर देखा जाए तो 2018 में एप्पल (APPLE) की कमाई 59.5 अरब ड़ालर थी यानि अरैमको ने एप्पल से 46 % ज्यादा मुनाफा कमाया है. अधिक तुलनात्मक नजर अपनाने पर पता चलता है कि भारत की 82% अर्थव्यवस्था के जितना अरैमको का यह मुनाफा है. कंपनी ने बिना किसी कर्ज और बिना शेयर बेचे ही इतना पैसा अर्जित (EARN) किया है.

एप्पल (APPLE) ,एल्फाबेट (ALPHABET), एक्जॉन मोबिल (EXON MOBIL), रॉयल डच (ROYAL DUTCH) और ऐमाजॉन (AMAZON) को पीछे छोड़कर अरैमको अव्वल रही है जबकि हैरानी बात यह है कि  एक्जॉन मोबिल अमेरिकी तेल कंपनी है और प्राफिट के मामले में वह अरैमको से कही ज्यादा पीछे है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडिज और फिंच के अनुसार सऊदी सरकार को टैक्स का 50% अरैमको से ही मिलता है.

अरैमको को लेकर सऊदी सरकार की अब होगी ऐसी योजना

अरैमको सऊदी सरकार के लिए आय का सबसे बड़ा स्त्रोत है क्योकि सरकार को टैक्स का 50%  हिस्सा अरैमको से ही मिलता है. सरकार के लिए यह एक सबसे बड़ा सकारात्मक बिंदू है इसलिए ही क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान चाहते है कि उनके देश की अर्थव्यस्था केवल तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर निर्भर न रहे. प्रिंस सलमान चाहते है कि देश किसी अन्य क्षेत्र में भी इनवेस्ट करे और तेल पर निर्भरता को कम किया जाए.

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क्राउन प्रिंस सलमान तकनीकि क्षेत्र पर भी इनवेस्ट करने की योजना बना रहे हैं. सलमान अरैमको के बांड बेचकर स्वास्थय (HEATH), टूरिज्म और माईनिंग के लिए भी काम करना चाहते हैं. इसी कार्ययोजना के तहत 2018 में यह जानकारी आयी थी कि अरैमको बांड बेचकर 10 अरब ड़ालर जुटाना चाहती है लेकिन अंदरूनी कलह के चलते ऐसा नहीं हो पाया है क्योकि सऊदी सरकार अरैमको में किसी तरह की पार्दशिता (TRANSPARENCY) नहीं चाहती है. इसलिए अब उम्मीद है कि बांड को लाने का विचार 2021 में किया जाएगा.

वैसे तो कंपनी इतनी अमीर है कि किसी भी बड़ी कंपनी को अगर चाहे तो आसानी से खरीद सकती है लेकिन क्राउन प्रिंस सलमान चाहते है कि कंपनी के कुछ बांड बेचकर ही दूसरे क्षेत्रों में भी इनवेस्टमेंट का रास्ता खोला जाए. अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ही सऊदी सरकार ने भारतीय स्वामित्व वाली ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट पर 60 मिलियन टन की रिफानरी बनाने पर बातचीत की है.

अरैमको का दुनिया की सबसे अमीर कंपनी बनने सफर काफी दिलचस्प है. इसकी सफलता में जितना योगदान कंपनी का खुद का है उतना ही सऊदी सरकार का भी है क्योकि सरकार ने समय रहते अपने देश के संसाधन (RESOURCE) के महत्व को समझा और उसकी उन्नति की दिशा में काम किया.

By soniya