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PACL Scam- इस आदमी ने किया India का सबसे बड़ा Investment Fraud

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आज की इस पोस्ट में हम इंडिया के सबसे बड़े Investment Fraud  के बारे में बात करेंगे जिसको आप इंडिया की सबसे बड़ी Ponzi scheme भी कह सकते हैं. Ponzi scheme वही Scheme होती है जिसमें लोगों से High return का वादा किया जाता है और इस तरह उनके साथ Fraud किया जाता है आज हम जिस Scheme के बारे में बात करने जा रहे हैं उसमें इंडिया के 5.5 करोड़ लोगों से कुल 50,000 करोड़ का Fraud किया गया.

जिस कंपनी में Fraud किया उसका नाम है PACL यानी Pearl Agrotech Corporation Limited तो चलिए विस्तार से जानते हैं क्या है यह Fraud?

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PACL ने सबसे पहले तो लोगों को बड़े रिटर्न के सपने दिखाए उन्होंने लोगों से वादा किया कि उनकी Scheme में Invest करके उन्हें कम समय में ज्यादा रिटर्न मिलेगा. PACL का कहना था कि कंपनी Investor से मिलने वाले पैसों को Land खरीदने में लगाती है और बाद में इस Land का उपयोग एग्रीकल्चर के लिए या फिर किसी अन्य काम के लिए किया जाएगा और उसके बाद इसे अच्छे प्रॉफिट पर बेचा जाएगा।

कंपनी का कहना था कि आप जितना भी कंपनी में Invest करेंगे उतनी Value का कोई Land आपको दे दिया जाएगा लेकिन कंपनी ने अपनी Scheem में कभी पारदर्शिता नहीं रखी, जब भी कोई कंपनी में Invest करता था तो उसे बस एक Receipt दे दी जाती थी जिसमें बताया जाता था कि उस व्यक्ति ने कंपनी में कितना Invest किया है और उस इन्वेस्टमेंट के बदले उसे कितनी Land Allot की गई है लेकिन उस Land से जुड़े Documents कभी जारी नहीं किए जाते थे और लोगों ने भी कभी इसके लिए ज्यादा जानकारी पाने के लिए इंटरेस्ट नहीं दिखाया क्योंकि उनसे वादा किया जाता था कि इस Land पर कंपनी कोई काम करेगी जिसके बाद High Profit पर उसे बेच देगी. Investors ने भी High return के लालच में ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश नहीं की.

कंपनी Investor को वादा करती थी की Invest करने के 5 साल बाद या तो आप अपना पैसा रिटर्न के साथ वापस पा सकते हैं या फिर इस Land को ले सकते हैं. लोगों को इस Land में कोई इंटरेस्ट नहीं था लोगों को इंटरेस्ट था तो मिलने वाले High return पर, Investor चाहते थे कि उन्होंने जितना Amount Invest किया है 5 साल बाद वह उन्हें High return के साथ मिल जाए. 

कंपनी Investor से कहती थी कि वह 5 साल या 10 साल के लिए कंपनी में Invest कर सकते हैं. साथ ही कंपनी 10 साल में Investor के पैसे को 4 गुना करने का वादा भी करती थी और जैसा कि हर Ponzi scheme में होता है PACL ने भी वैसे ही अपने शुरुआती Customer को Regular return देना शुरू कर दिया जिससे लोगों में कंपनी के लिए भरोसा और बढ़ गया इसके बाद वो और लोगों को भी इस Scheme के बारे में बताने लगे और अपना Investment भी कंपनी में बढ़ाने लगे.

कंपनी जानती थी अगर उन्हें तेजी से आगे बढ़ना है तो उसे हर Ponzi scheme की तरह Pyramid सिस्टम को लाना होगा जिसके तहत हर Investor को नए कस्टमर लाने पर अच्छा खासा कमीशन दिया जाने लगा. लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को इस Scheme में जोड़ने लगे. जगह-जगह सेमिनार होने लगे और कंपनी में नए कस्टमर आना शुरू हो गया.

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सेमिनार में बताया जाता था की यह कंपनी 1983 से चल रही है और अपने Investors को लगातार अच्छा रिटर्न दे रही है. साथ ही Investor से यह भी कहा जाता था अगर आपके दिमाग में यह बात चल रही है कि कंपनी बंद हो सकती है तो वह कहते थे कि अगर कंपनी बंद होती है तो आपको दी हुई रसीद को लेकर आप MCA यानी Ministry of corporate affairs जा सकते हैं क्योंकि कंपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है जो Ministry of corporate affairs के अंदर आती है यानी वो Investor से झूठ बोलने लगे क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं था. वह Investor को बताते थे कि कंपनी 1983 में शुरू हुई है लेकिन कंपनी 1996 में शुरू हुई थी. हालांकि इस ग्रुप की एक और कंपनी PGF 1983 से काम कर रही थी.

SEBI को 1998 से 1999 तक बहुत सी ऐसी Fraud Compnies की Complain आ रही थी जिसके बाद सेबी ने 1999 में CIS (Collective Investment Scheme) रेगुलेशन Launch किया इसके तहत उन कंपनियों के लिए Guideline जारी की गई जिसमें Investor से पैसा Collect किया जाता है और किसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है और बाद में जो भी प्रॉफिट मिलता है उसे Investor के बीच बांट दिया जाता है. इस Guideline के तहत SEBI ने साफ कर दिया था इस तरह से काम करने वाली कंपनी को Guideline का पालन करना होगा और ऐसा न करने पर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी.

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बाद में SEBI ने पाया कि PGF और PACL दोनों ही कंपनी इस Guideline का पालन नहीं कर रही हैं इसलिए SEBI ने इनसे अपना Operation बंद करने और जिन Investor से पैसा लिया है उन्हें पैसा लौटाने के लिए कह दिया लेकिन उन्होने इसे नहीं माना और इसके बाद PGF ने पंजाब हाईकोर्ट और PACL ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश का विरोध किया. इसके बाद पंजाब हाई कोर्ट ने कहा की PGF एक CIS यानी Collective Investment Scheme है जो SEBI द्वारा जारी Guideline का पालन नहीं कर रही है इसलिए उसे Operation बंद करना होगा लेकिन पंजाब हाई कोर्ट ने PGF के किसी भी Promoter पर कोई कार्यवाही नहीं की.

PGF और PACL दोनों ग्रुप का काम लगभग एक जैसा ही था इन दोनों कंपनियों में केवल एक Difference था की PGF बड़े Amount में पैसा Collect करती थी जबकि PACL छोटे Amount में भी पैसा Collect करती थी. 

इसके बाद 2003 में राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा PACL CIS यानी Collective Investment Scheme नहीं है इसलिए वह अपना Operation चालू रख सकते हैं. इसके बाद PACL ने अपनी Fraud Scheme जारी रखी लेकिन SEBI यहाँ पर भी नहीं रुकी और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

सुप्रीम कोर्ट में कई सालों तक ये केस चलता रहा उसके बाद 25 फरवरी 2013 को इसका निर्णय आया इसमें PACL को CIS यानी Collective Investment Scheme माना गया और SEBI को आदेश दिया कि वह इसकी जांच करें और कंपनी के खिलाफ एक्शन ले. 

Decision आने से पहले कई साल सुप्रीम कोर्ट में यह केस चलता रहा जिस दौरान PACL ग्रोथ करती रही बाद में जब Investor ने भी PACL से उनके लिए खरीदे गए Land की जानकारी मांगी तो दबाव बढ़ने पर PACL ने राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास 1000 एकड़ की बंजर जमीन खरीदी. इसमें किसी भी तरह का कोई Development work नहीं किया गया था. Investor से Collect किए गए पैसों से PACL के Promoters ने अलग-अलग Assets में Invest किया था.

सुप्रीम कोर्ट का Decision आने तक कंपनी लगातार Growth करती रही. यहां तक कि उन्होंने अपना एक न्यूज़ चैनल भी खोला जिसके जरिए वह अपनी Scheme को Promote करती थी। इसके अलावा IPL की टीम किंग्स इलेवन पंजाब में भी उनका एक ग्रुप Pearls Infrastructure Projects Limited स्पॉन्सर था और ब्रेट ली उनके Brand ambassador थे.

इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट का Decision आने तक कंपनी 5.5 करोड़ लोगों से 50,000 करोड़ रुपए Collect कर चुकी थी. इसमें ज्यादातर पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लोग थे. इसके बाद Investigation पूरा होने के बाद सेबी ने 22 अगस्त 2014 को कंपनी से सभी Investors का पैसा वापस करने को कहा लेकिन PACL ने ऐसा नहीं किया जिसके बाद Enforcement Director ने कंपनी के Chief निर्मल सिंह भंगू और बाकी लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की और साथ ही कंपनी द्वारा ली गई Land को अपने कब्ज़े में लेना शुरू किया लेकिन उन Land की कीमत Collect किए गए इन्वेस्टमेंट से बहुत कम थी. उसके बाद 2016 में CBI ने कंपनी के Chief निर्मल सिंह को गिरफ्तार किया.

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इस पूरे केस में सबसे गंभीर बात जो सामने आई वह यह थी कि PACL कंपनी के लीगल एडवाइजर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली थे. जब केतन पारेख का मामला सामने आया था तब भी विवाद हुआ था क्योंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट में अरुण जेटली ने ही केतन पारेख का केस लड़ा था.

अब बात करते हैं उन Investors के बारे में जिन्होंने इस कंपनी में Invest किया था. Fraud सामने आने के बाद Investors को Refund के नाम पर Fraud मैसेज आने लगे कि अगर आप अपना पैसा वापस पाना चाहते हैं तो आपको Total amount का 10% GST के तौर पर हमें देना होगा. इसके बाद बहुत से Investor फिर से एक Fraud में फंस गए.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर था की Investors को उनके पैसे वापस दिए जाए लेकिन लंबे समय तक पैसा ना मिलने से Investors ने Protest करना चालू कर दिया लेकिन इन Investors में Invest करने से पहले यह नहीं देखा कि वह जिस कंपनी में Invest कर रहे हैं उसके Promoters ने खुद कंपनी में केवल 21 करोड़ का निवेश किया है. इसके बाद SEBI ने रिफंड जारी करने के लिए एक वेबसाइट लांच की और Refund की Process शुरू की लेकिन PACL के इतने ज्यादा Assets इतने नहीं थे कि सभी Investor को पैसा वापस किया जा सके. Investment refund की Process आज भी चल रही है लेकिन ज्यादातर लोगों को रिफंड नहीं मिला है और लगता भी नहीं कि आगे मिलेगा क्योंकि PACL के Assets, Investment की तुलना में बहुत कम थे.

आज भी इंडिया में बहुत सी ऐसी Ponzi Scheme चल रही हैं जो लोगों को High return का वादा करती हैं लेकिन हमारी Request है कि आप लोग ऐसी किसी भी Scheme से सावधान रहें.

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author

Amit