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भारतीय शेयर बाजार में इनवेस्टमेंट की 5 अनोखी कहानियां...


स्टॉक मार्केट की अनेकों कहानियां तो आपने अक्सर सुनी होंगी, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है जिनकी कहानियां आपको न सिर्फ अचंभित करेंगी बल्कि स्टॉक मार्केट को लेकर आपके जितने भी खराब अनुभव  है या फिर बाजार को लेकर गलत धारणाएं है इन लोगों की कहानियों को सुनकर आपकी वह धारणाएं प्रेरणा में बदल जाएंगी.

शुरूआत करते हैं भारत के वॉरेन बफ्फेट कहें जाने वाले राकेश झुनझुनवाला से...

1 राकेश झुनझुनवाला (RAKESH JHUNJHUNWALA)

Rakesh

शायद ही किसी ने सोचा होगा कि सिर्फ 14 साल की उम्र में न्यूज़पेपर में स्टॉक मार्केट का हाल जानने वाला लड़का एक दिन भारत का वॉरेन बफ्फेट कहलायेगा. राकेश झुनझुनवाला एक मारवाड़ी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता इंकम टैक्स अधिकारी रह चुके हैं और अपने पिता की ही सलाह पर उन्होंने 14 साल की उम्र से न्यूज़पेपर के जरिए स्टॉक मार्केट का हाल जानना शुरू कर दिया था.

राकेश का जन्म 5 जौलाई 1960 को मुंबई में हुआ था. राकेश ने सिडेनहम कॉलेज ( SYDENHAM COLLEGE ) से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और इसके बाद 1985 में चार्टेंड अकाउंट ऑफ इंडिया (CHARTERED ACCOUNT OF INDIA) से अपना चार्टेंड अकाउंट (CHARTERED ACCOUNT) पूरा किया. राकेश को बचपन से ही स्टॉक मार्केट में काफी दिलचस्पी थी इसलिए ही उन्होंने अब स्टॉक मार्केट में इनवेस्टिंग का मन बना लिया था, लेकिन राकेश के पास इनवेस्टिंग (INVESTING ) के लिए सिर्फ 5000 रूपये ही थे. राकेश ने इनवेस्टिंग के लिए अपने भाई की मदद ली.

राकेश ने 1986 में टाटा-टी (TATA TEA) के 5000 शेयर्स 43 रूपये के रेट से खरीद लिए और तीन महीनें बाद ही उन शेयर्स को 143 रूपये के रेट से बेच दिया. इससे उन्हें 5 लाख रूपये का मुनाफा हुआ. राकेश ने ट्रेडिंग के जरिए शेयर बाजार में इनवेस्टिंग की शुरूआत की थी. ट्रेडिंक काफी जोख़िम भरे होते हैं लेकिन अपनी सूझबूझ से उन्होंने 1986 से 1989 के बीच काफी मुनाफा कमाया. 1989 में उन्होंने सेसा गोवा (SESA GOA) के 1 करोड़ शेयर्स को 24-25 रूपये के रेट से खरीदा फिर उन्हें तीन से चार गुना दाम में बेच दिया. इससे राकेश को 2.5 करोड़ का मुनाफा हुआ.

राकेश झुनझुनवाला का टर्निंग प्वाईंट 2002-2003 में आया. उन्होंने टाइटैन कंपनी (TITAN  COMPANY) के 6 करोड़ शेयर को 3 रूपये के रेट से खरीदा बाद में उन खरीदे गए शेयर्स का दाम 3 रूपये से 390 रूपये हो गया. इससे उन्हें 21 सौ करोड़ का फायदा हुआ. राकेश को असफलता का मुंह भी देखना पड़ा. दिसंबर 2011 में उन्होंने जिन बड़ी कंपनियों में इनवेस्ट किया उसमें उन्हें 30% तक घाटा हुआ लेकिन 2012 में ही उन्होंने अपनी समझदारी से उस घाटे को रिकवर भी कर लिया.

आज राकेश झुनझुन वाला लगभग 20 हजार करोड़ के मालिक है और फोर्ब्स (FORBES) के अनुसार झुनझुनवाला भारत के 53वें सबसे अमीर आदमी है. आज राकेश की खुद की इनवेस्टिंग कंपनी रेर इंटरप्राइजेज़ (RARE ENTERPRICES) भी है और वो इनवेस्टर होने के साथ ही ऐपटैक लिमिटेड (APTECH LTD) और हंगामा डिजिटल मीडिया (HUMGAMA DIGITAL MEDIA) के चेयरमैन भी हैं.

राकेश झुनझुनवाला का एक मंत्र है- BUY RIGHT AND HOLD TIGHT… मतलब सही शेयर खरीदें और सब्र के साथ उसे होल्ड करें

2 विजय केडिया (VIJAY KEDIA)

VijayKedia

स्टॉक मार्केट में गहरी समझ के साथ ही काफी सब्र रखने की भी जरूरत होती है. समझ और सब्र का ही उदाहरण है विजय केडिया. विजय केडिया स्टॉक मार्केट की दुनिया में सफलतम इनवेस्टर के रूप में देखे जाते हैं. विजय केडिया स्टॉक ब्रोकर के परिवार से ताल्लुक रखते हैं कम उम्र में ही उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार को स्पोर्ट करने के लिए फैमिली बिज़नेस को ज्वाईन किया. 

1978 में सिर्फ 18 साल की उम्र में उन्होंने स्टॉक मार्केट की दुनिया में कदम रखा. 1990 में मुंबई आए और किराये के घर में रहने लगे. विजय ने भी काफी कम रूपयों से स्टॉक मार्केट में इनवेस्टिंग की शुरूआत की थी. उन्होंने सिर्फ 35,000 रूपयों से इनवेस्ट किया था.

विजय ने एक ही स्टॉक पर 35,000 हजार रूपयों को इनवेस्ट किया. उन्होंने पंजाब ट्रैक्टर (PUNJAB TRACTOR) के शेयर पर इन पैसों से इनवेस्ट कर दिया.  विजय के द्वारा इनवेस्ट गया पैसा तीन साल में ही तीन बार ऊपर गया और 35,000 से 1,05000 हो गया. विजय ने इस सारे पैसे को एसीसी (ACC) में 300 रूपये के रेट से लगा दिया. पहले साल तो इसमें कोई भी बढ़ोतरी नहीं हुई लेकिन दूसरे साल में ही यह दस गुना बढ़कर 300 से 3000 हो गया. विजय ने इस रिटर्न से मुंबई में घर खरीद लिया.

इसके बाद उन्होंने अतुल ऑटो (ATUL AUTO) और सेरा सेनिट्रीवेयर (CERA SENITARYWARE) में इनवेस्ट किया यहां से उन्हें 10 सालों में 100 बार रिटर्न मिला. विजय केडिया ने जो भी स्टॉक खरीदा वह मल्टीबैगर में बदल गया. आज विजय केडिया शेयर मार्केट में 15 से ज्यादा लिस्टिड कंपनियों में 1% स्टेक होल्डर हैं.

3 पोरिंजू वेलियत (PORINJU VELIYATH)

Porinjuveliyat

पोरिंजू वेलियत भी स्टॉक मार्केट में एक ऐसा नाम है जिन्होंने समझदारी के साथ बेहतर इनवेस्ट किया और इनवेस्टमेंट पर मिली रिटर्न से लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा. वेलियत का जन्म 6 जून 1962 में  कोच्ची (KOCHI) में हुआ. पोरिंजू ने काफी संघर्षों का सामना किया और केवल 16 साल की उम्र में काफी वित्तीय दिक्कतों को देखकर नौकरी करने का फैसला किया. पोरिंजू ने परिवार को स्पोर्ट करने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी शूरू कर दी. लॉ (LAW) की डिग्री लेने के बाद 1990 में उन्होंने मुंबई में कोटेक सिक्योरिटी (KOTAK SECURITIES) के साथ फ्लोर ट्रेडर (FLOOR TRADER) की नौकरी से शुरूआत की. उनके लिए यह फिल्ड काफी नया था. कोटेक के साथ चार साल काम करते हुए उन्होंने स्टॉक मार्केट के बारे में बारीकि से जाना. 1994 में कोटेक को छोड़कर पराग पारिख़ सिक्योरिटीज़ (PARAG PARIKH SECURITIES) को फंड मैनेजर (FUND MANAGER) और रिसर्च एनालिस्ट (RESEACH ANALYST) के तौर पर ज्वाईन कर लिया।

पोरिंजू वेलियत को स्टॉक मार्केट में इनवेस्ट करना था. 1999 में पराग पारेख़ को छोड़कर वेलियत वापस अपने शहर कोच्ची लौट गए और अपने शहर में रहकर ही स्टॉक मार्केट में इनवेस्ट करने का मन बनाया.

पोरिंजू वेलियत ने पहली बार जेयोजित फाईनैंनशियल सर्विस (GEOJIT FINANCIAL SERVICES) में बड़ी इनवेस्टमेंट की. वेलियत के इस फैसले को सभी ने बड़ा ही जोख़िम भरा फैसला बताया क्योकि उस समय जेयोजित के स्टॉक काफी कम वैल्यू पर ट्रेड कर रहे थे. सभी की बातों को नज़रअंदाज करते हुए वेलियत ने अपना पूरा ध्यान जेयोजित के स्टॉक पर लगाए रखा. कुछ समय बाद ही जेयोजित से वेलियत को कई गुना रिटर्न मिला.

पोरिंजू ने श्रेयस शिपिंग एंड लॉजिस्टिक (SHREYASH SHIPPING & LOGISTIC) में भी इनवेस्ट किया. 2012 में इसका स्टॉक 30 रूपये पर ट्रेड कर रहा था लेकिन 7 अगस्त 2015 को यह 839 पर पहुंच गया, जिससे उन्हें काफी मुनाफा हुआ.

2002 में पोरिंजू वेलियत ने अपनी खुद की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट फर्म को ओपन किया आज उनकी यह फर्म कई बड़े बिज़नेसमैन की पोर्टफोलियो को मैनेज़ कर रही है.

4 रमेश दमानी (RAMESH DAMANI)

rameshdamani

स्टॉक मार्केट की दुनिया में एक नाम ऐसा भी है जिसे शेयर बाजार में जरां भी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन जब स्टॉक मार्केट की दुनिया में कदम रखा तो सभी को अपनी समझ से चौंका दिया. रमेश दमानी स्टॉक मार्केट की दुनिया का एक ऐसा ही नाम है. 

रमेश दमानी के पिता को स्टॉक मार्केट का 20-30 सालों का अनुभव रहा. उनके पिता की स्टॉक मार्केट में काफी दिलचस्पी थी. उनके पिता चाहते थे कि रमेश भी स्टॉक मार्केट की ओर अपना रूझान रखे, लेकिन रमेश स्टॉक मार्केट में बिल्कुल भी आना नहीं चाहते थे. रमेश दमानी ने अपनी ग्रेजूएशन एच.आर. कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इक्नॉमिक्स (H.R. COLLEGE OF COMMERCE & ECONOMICS ) से की और इसके बाद कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी (CALIFORNIA STATE UNIVERSITY ) से अपना एमबीए (MBA) पूरा किया.

रमेश के पिता ने एक प्लान बनाया और 10,000 USD (U.S. DOLLER)  रमेश को देकर उस पैसे को स्टॉक मार्केट में इनवेस्ट करने को कहा. उन्होंने शर्त रखी कि.- अगर तुम इस पैसे को दोगुना करोगे तो यह पैसा तुम्हारा हो जाएगा, लेकिन अगर यह पैसा डूब जाता है तो इस बारे में कभी कोई सवाल नहीं किया जाएगा. लेकिन शर्त थी कि इस पैसे को केवल स्टॉक मार्केट में ही इनवेस्ट करना है. 

उन्होंने शर्त को मंजूर कर पैसे को स्टॉक मार्केट में लगाया, लेकिन 6 महीनों के अंदर ही रमेश को काफी नुकसान हुआ. रमेश को इस घाटे से काफी दुख हुआ. वह बार बार सोच रहे थे कि एक नामित यूनिवर्सिटी से एमबीए पास-आउट करने के बाद कोई कैस स्टॉक मार्केट में इतनी भारी रकम गवां सकता है.

1989 में रमेश दमानी बोम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BOMBEY STOCK EXCHANGE) के सदस्य बने. रमेश दमानी ने स्टॉक मार्केट की दुनिया में सबसे बड़ा स्टॉक 1993 में खेला. उन्होंने उस समय इनवेस्ट करना शुरू किया जब सेंसेक्स 600 के प्वाईंट पर था. उन्होंने इंफोसिस (INFOSYS) और सीएमसी (CMC) दोनों में 10 लाख की इंवेस्टमेंट की.  1999 में रमेश को इस इनवेस्टमेंट का 100 गुना ज्यादा मुनाफा मिला.

आज रमेश दमानी बिलियन डालर की संपत्ति के मालिक है. इवैन्यू सुपरमार्ट लिमिटेड (AVENUE SUPERMART LTD.) के चेयरमैन और ऐपटैक लिमिटेड (APTECH LTD.) और रमेश एस दमानी फाईनैंन लिमिटेड (RAMESH S. DAMANI FINANCE LTD.) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भी हैं. 

हैं न हैरत वाली बात... जिस व्यक्ति की स्टॉक मार्केट में बिलकुल भी रूचि नहीं थी, उस व्यक्ति का नाम आज टॉप के इनवेस्टर्स में शामिल किया जाता है.

5 डॉली खन्ना (DOLLY KHANNA)

Dollykhanna

अभी तक आपने स्टॉक मार्कट की दुनिया में बड़े-बड़े नाम सुने होंगे लेकिन वो नाम केवल पुरूषों के होंगे. इनवेस्टिंग की दुनिया में ड़ॉली खन्ना पहला ऐसा नाम है जो सफलता प्राप्त महिलाओं में से एक हैं.

डॉली खन्ना के नाम को आपने अक्सर राजीव खन्ना के नाम साथ जरूर सुना होगा. राजीव खन्ना उनके पति का नाम है. एक तरह से कहे तो राजीव खन्ना डॉली खन्ना के स्टॉक के लिए उनके ब्रेन की तरह काम करते है और डॉली खन्ना का पोर्टफोलियो भी राजीव खन्ना ही मैनेज करते हैं. चेन्नई से ताल्लुक रखने वाले राजीव खन्ना और डॉली खन्ना ने 1995 में अपना फैमिली बिज़नेस क्वालिटी मिल्क फूड (KWALITY MILK FOODS) को हिन्दुस्तान यूनिलिवर (HINDUSTAN UNILEVER) को बेचा तो इन दो नामों की चर्चा हुई. 

1996 से डॉली खन्ना ने स्टॉक मार्केट में इनवेस्टिंग की शुरूआत की. 2003 में डॉली खन्ना के पति राजीव खन्ना ने यूनिटेक (UNITECH) के शेयर 5 लाख रूपये में डॉली खन्ना के नाम से खरीदे. राजीव इन शेयर्स को लगातार स्टॉक करते रहे और 2008 में इनकी वैल्यू 25 करोड़ हो गई. 

डॉली खन्ना ने जून 2009 में हॉकिंस प्रेशर कुकर (HOWKINS PRESURE COOKER) के 130-140 के दाम में शेयर खरीदे. आज उन शेयर्स की कीमत 3400 रूपये है. इसके अलावा कंपनी ने इन्हें डीविडेंट के तौर पर 70% मुनाफा भी दिया है.

इसी तरह से 2014 में डॉली खन्ना ने नीलकमल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी (NILKAMAL MANUFACTURING COMPANY) ( जो कि भारत की होम एंड ऑफिस फर्नीचर के क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनी है) के शेयर खरीदे. तीन सालों में ही इनके द्वारा खरीदे गए शेयर्स की कीमत 900 गुना बढ़ गई. मार्च 2014 में नीलकमल में डॉली के शेयर्स की कीमत 197.30 रूपये थी और तीन साल बाद मार्च 2017 में शेयर्स की कीमत 1966 रूपये हो गई.

राजीव खन्ना और डॉली खन्ना का नाम मुंबई दलाल स्ट्रीट में टॉप के इनवेस्टर की लिस्ट में शामिल है. स्टॉक मार्केट में लिस्टिड 14 कंपनियों में डॉली खन्ना की 1%  तक की होल्डिंग है.

By Soniya