कैसे चीन Coronavirus परिस्थिति का फायदा उठा रहा है?


कोरोना वायरस के कारण चल रहे Lockdown की वजह से लगभग हर कंपनी का प्रोडक्शन Slow होता जा रहा है लगभग सभी देश कोरोना वायरस को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जिस वजह से Lockdown जारी रहने से उनकी Economy पर भी असर पड़ रहा है. बहुत सी कंपनियों के शेयर प्राइस भी तेजी से गिर रहे हैं इस वजह से इन कंपनी का Valuation भी कम हो रहा है. ऐसे में चाइना की निगाहें कहीं और ही हैं. चाइना कोरोनावायरस की इस परिस्थिति को एक मौके की तरह देख रहा है और चाइना कोशिश कर रहा है इस मौके का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाकर ज्यादा से ज्यादा Companies को Aquire कर लिया जाए.

चाइना का हमेशा से यह Focus रहा है कि जब भी कोई देश मुसीबत में होता है तो उस पर ज्यादा से ज्यादा Invest करना और ऐसा करते हुए बाद में उस देश को कंट्रोल कर लेना.

अगर बात करें भारत की तो यहां पर भी बहुत सी Companies के शेयर नीचे गिर रहे हैं. HDFC की बात करें तो HDFC बैंक का शेयर जनवरी महीने से अब तक लगभग 35% गिर चुका है और इस मौके का फायदा उठाते हुए चाइना ने HDFC बैंक के 1.75 करोड़ शेयर खरीद लिए हैं जिससे HDFC बैंक में चाइना की हिस्सेदारी 1.01% हो गई है लेकिन चाइना की इस चाल को इंडिया समझ चुका है और इसे देखते हुए इंडिया ने अपने FDI रूल में भी चेंज किए हैं और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि Lockdown के कारण देश मंदी की तरफ बढ़ रहा है और आगे जाकर Companies को फंड की जरूरत पड़ेगी, वैसे अमेरिका भारत के बाजारों में काफी ज्यादा इन्वेस्ट करता है लेकिन कोरोना वायरस के कारण अमेरिका की हालत भी ठीक नहीं है और इस समय चाइना भारत की Companies और Startup पर बहुत ज्यादा Invest करता है तो चाइना का भारत की Companies और Startup में Invest करना आने वाले समय में भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है और इसीलिए भारत Alert हो चुका है और भारत ने FDI नियम में चेंज किए हैं.

hdfc

इस बदलाव के बाद चाइना, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों को भारत में इन्वेस्ट करने से पहले भारत सरकार से मंजूरी लेनी होगी. इस बदलाव से पहले चाइना को भारत की कंपनी में Invest करने से पहले सरकार से Permission लेने की जरूरत नहीं थी जिसका चीन ने पूरा फायदा उठाया और पिछले कुछ सालों में भारत की Companies और Startup में बहुत ज्यादा Invest किया.

FDI नियमों में बदलाव का एक और बड़ा कारण है और वह है Hostile Takeover जिसके तहत कंपनी से Permission लिए बिना ही Stock market से Direct शेयर खरीद कर अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाया जाता है और फिर धीरे-धीरे कंपनी का टेकओवर किया जाता है. भारत सहित बहुत से ऐसे देशों को इस बात की चिंता है कि इस मंदी का फायदा उठाकर चीन बड़ी मात्रा में Invest कर Hostile Takeover का फायदा उठा सकता है.

अब FDI नियम के अनुसार अगर चाइना भारत में कोई Investment करना चाहता है तो उसको Government से Permission लेनी पड़ेगी इसके साथ ही जिन Companies में उसने पहले से इन्वेस्ट किया है उसे किसी और को बेचने के लिए भी उसे सरकार की Permission लेनी पड़ेगी.

बहुत सारी चाइनीस कंपनी जैसे अलीबाबा, बाइट डांस और टेंसेंट ने भारत की कुछ कंपनियों में इन्वेस्ट किया हुआ है. भारत में कुल 31 यूनिकॉर्न है. यूनिकॉर्न ऐसे स्टार्टअप होते हैं जिनका Total valuation 1 बिलियन डॉलर यानी 7000 करोड़ से ज्यादा होता है. इन 31 में से 18 स्टार्टअप में चाइना ने इन्वेस्ट किया है. अलीबाबा की Zomato में 23% हिस्सेदारी है. इसके अलावा उसकी Paytm, Paytm Mall, Snapdeal और Big Basket में भी हिस्सेदारी है. ऐसे ही टेंसेंट ने Khatabook, Udaan, BYJU'S जैसे Startup में इन्वेस्ट किया है. TikTok की Parent कंपनी Byte dance ने भी डेलीहंट में 25 मिलियन डॉलर का इन्वेस्ट किया है. इसके अलावा MG Motors एक चाइनीस कंपनी है जो भारत में तेजी से अपना Business फैलाने की कोशिश कर रही है.

इंडियन चाइना का असली चेहरा जानते हैं इसलिए हम ज्यादातर भारतीय इन चाइनीस प्रोडक्ट का बहिष्कार करते हैं और इसलिए चाइना पीछे के दरवाज़े से Entry लेता है उदाहरण के लिए बात करते हैं TikTok की Parent कंपनी Byte dance की Byte dance की चाइना में TouTiao नाम से एक बड़ी News aggregator application है लेकिन इसके बाद भी उन्होंने इंडिया में इसे Launch ना करके डेलीहंट में हिस्सेदारी खरीदी. ऐसा ही अलीबाबा ने भी किया, अलीबाबा का TMall चाइना में बहुत famous है लेकिन TMall को इंडिया में Launch करने के बजाय अलीबाबा ने Paytm Mall में इन्वेस्ट किया.

अगर बात करें चाइना के Investment capacity की तो चाइना के पास फिलहाल 3 ट्रिलियन डॉलर का Foreign exchange reserve है यानी करीब 228 लाख करोड़ जिसका इस्तेमाल वो फिलहाल कोरोना की वजह से जो Downfall आया है उसमें करने की तैयारी कर रहा है.

चाइना की ज्यादातर कंपनियों पर आरोप लगता रहता है कि वह अपना डाटा चीन की सरकार के साथ शेयर करती हैं. यही डर भारत को भी है.

हाल ही में Huawai जो कि एक चाइनीस कंपनी है पर आरोप लगा था कि वह अपना डाटा चीन की सरकार के साथ शेयर कर रही है. यह आरोप अमेरिका सहित बहुत से देशों ने लगाया है जिसके बाद अमेरिका और बहुत से अन्य देशों ने इसे ब्लॉक कर दिया है जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी शामिल है. हालांकि भारत ने अभी इसपर कोई एक्शन नहीं लिया है.

hawaei

चाइना के इस खेल को अब लगभग हर देश समझ चुका है जिसको देखते हुए यूरोप के बहुत से देश जैसे इटली, स्पेन, जर्मनी ने FDI नियमों में बदलाव किया है ताकि चाइना Hostile तरीके से वहां की कंपनीज पर ज्यादा स्टेक हासिल ना कर पाए.

अमेरिका की पहले से ही चाइना के साथ अनबन चल रही है इसलिए हाल ही में जब चाइना की एक कंपनी US की किसी कंपनी को एक्वायर करने गई थी तो अमेरिका ने बीच में Interfare करके इस Deal को Cancil कर दिया.

बाकी देशों को यह भी डर है कि अमेरिका को पीछे चीन सुपर पावर ना बन जाए क्योंकि अगर ऐसा होता है चीन छोटे देशों को डरा-धमका कर अपनी बात मनवा सकता है. 

चीन जानता है कि भारत और यूरोप के बहुत सारे देश चाइनीस कैपिटल के बिना भी Survivor कर सकते हैं लेकिन बहुत से ऐसे देश होंगे जो कोरोना से बहुत ज्यादा प्रभावित होंगे और जब चाइना उन्हें इसके लिए कैपिटल Provide करेगा तो वह मना नहीं कर पाएंगे और चाइना इसी इंतजार में है कि कब अफ्रीका और दुनिया के दूसरे भागों में स्थित छोटे देश कोरोना के प्रकोप से घिर जाए और चीन से मदद लें, चीन ने अफ्रीका के बहुत से देशों में पिछले 3 सालों में बहुत ज्यादा इन्वेस्ट किया है. 

चाइना विश्व की सबसे बड़ी ट्रेडिंग पावर भी हैं. उसने पिछले साल 4.43 Trilion डॉलर का इन्वेस्ट किया था जबकि अमेरिका ने 3.89 ने Trilion डॉलर का इन्वेस्ट किया था और अपने इस ट्रेड को बढ़ाने के लिए चाइना सबसे ज्यादा Focus अफ्रीका पर कर रहा है. 

चाइना की अभी Strategy यही है की पहले गरीब देशों जैसे पाकिस्तान और अफ्रीका के कई देशों में उनका इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि रोड, बिल्डिंग आदि बनाने में हेल्प करना जिससे उनको लगता है कि उन्हें अच्छा Devlopment partner मिला है लेकिन चीन जब-जब किसी देश की मदद करता है तब-तब वह उन्हें कर्ज देता है और जब यह कर्ज बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तब चाइना उन पर अपने मन मुताबिक काम करने का दबाव बनाता है.

इन देशों को पहले समझ नहीं आता कि चाइना उनकी मदद इसलिए कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा समाज इन देशों में Export कर सके और अपना सामान उस देश को भेज सकें और जब यह देश चाइना के कर्ज तले दब जाते हैं तब चाइना अपने मन मुताबिक इन देशों को चलाने लगता है.

इसका सबसे अच्छा उदाहरण पाकिस्तान है. चाइना की नजर पाकिस्तान के Natural resources पर है साथ ही चाइना अपना सामान पाकिस्तान में Export कर उसे बेचना चाहता है. इसके अलावा चाइना ने हाल ही में कोरोना वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इस वैक्सीन का परीक्षण वह पाकिस्तान के लोगों में कर रहा है ताकि अगर इस परीक्षण का कोई नुकसान होता भी है या कोई मरता भी है तो वह उनके देश का ना हो.

चाइना की बहुत सी कंपनियां बहुत अच्छा काम कर रही है. भारत जैसे देश में भी टिक-टॉक, हेलो, वीवो, ओप्पो जैसी चाइनीस companies बहुत अच्छा बिज़नेस कर रही है. बहुत से लोग नहीं जानते की डाटा एक नयी करेंसी है और चाइनीस कंपनियां वहां की सरकार से कब यह डाटा शेयर कर दें कोई नहीं जानता क्योंकि वहां पर अगर कोई पत्रकार भी वहां की सरकार के खिलाफ बोलता है तो उसे चुप करा दिया जाता है और फिर कंपनी को तो अपना काम चलाना है इसलिए वहां की सरकार उन पर आसानी से दबाव बना सकती है।

टिक-टॉक प्लेटफार्म वैसे तो फ्री है लेकिन अगर देखा जाए टिक-टॉक का User Behavior pattern data बहुत कीमती है. आज भारत के Smartphone बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी चाइनीस कंपनियों की ही है लेकिन अब भारत के Customers को साथ आकर इंडियन कंपनी को सपोर्ट करना चाहिए लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होगा क्योंकि इसके लिए भारतीय कंपनियों को आगे आना होगा. आज अगर कोई भारतीय कंपनी बढ़ना चाहती है तो उन्हें बाहर के Investor से Fund लेना पड़ता है.

हम ज्यादातर भारतीयों का पैसा या तो नगद में पड़ा रहता है या सोने-चांदी में Invest रहता है लेकिन अगर Indian companies को बढ़ावा देना है तो हम सबको साथ आकर कुछ ना कुछ Amount हर महीने इन्वेस्ट करना चाहिए ताकि भारतीय कंपनियां भी आगे बढ़ने के लिए कैपिटल कलेक्ट कर पाए.

बहुत सारे देशों को चाइना का असली चेहरा नहीं पता था लेकिन कोरोना वायरस के फैलने के बाद लगभग सभी को चाइना का असली चेहरा पता चल चुका है इसलिए वह चाहते हैं की चाइना के साथ उनका Business relation कम ही रहे तो अच्छा है और इसलिए उन्होंने वहां से काम बंद करके Alternative ढूंढना शुरू कर दिया है जैसे South Korean कंपनी Hyundai steel ने चाइना में अपना प्रोडक्शन बंद कर भारत में इसे खोलने की शुरुआत की है. इसके लिए वह आंध्र प्रदेश में 5000 एकड़ जमीन की तलाश में है. इसके अलावा और भी कंपनियां चाइना से भारत आना चाहती हैं.

hyundai

जापान ने अपने देश की कंपनियों को 20000 करोड़ रुपए का बजट पास किया है ताकि वहां की कंपनियां चाइना में काम बंद करके दूसरी जगह काम शुरू करें. फिलहाल भारत में 1441 Japanese companies हैं जिसमें से ज्यादातर बेंगलुरु में है. फिलहाल सरकार ने कहा है कि वह इस तरह की companies को भारत में Plant शुरू करने के लिए मदद करेगी और अगर ऐसा होता है तो भारत के बहुत से लोगों को Job मिलेगी और बहुत से लोग अपना Manufacturing business भी शुरू कर सकेंगे. अगर भारत में फिलहाल सबसे ज्यादा जॉब और सबसे बड़ी बिज़नेस अपॉर्चुनिटी किसी Sector में है तो वह है Manufacturing sector में, भारत अभी आईटी सर्विस में पूरी दुनिया को लीड करता है भारत की कंपनी टीसीएस का सारा काम IT Outsourcing पर निर्भर है और वह बाहर देशों के IT Project का Contract लेती है. कुछ साल पहले इंडिया में एक IT Boom आया था जिसके बाद इंडिया की बहुत सी IT company बहुत बड़ी बन गयी.

ऐसी ही Opportunity अब Manufacturing sector में दिख रही है. अगर भारतीय सरकार बाहर से आ रही companies को वैसे ही सहायता दे जैसी चाइनीस गवर्नमेंट अब तक उनको दे रही थी तो भारत का भविष्य बहुत बेहतर हो सकता है. भारत सरकार को और वहां के लोगों को फ़िलहाल इस बात पर Focus करने की जरूरत है कि जो Opportunity हमें दिख रही है उसको अच्छे से Capitalize करना ना कि बहाने बनाते रहना.

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें, धन्यवाद.

By Amit