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978 करोड़ की लागत का था चंद्रयान-2: सपने टूटे हैं, पर हौसले नहीं


आज हम 978 करोड़ की लागत में बने चंद्रयान-2 मिशन की बात करेंगे।

चंद्रयान के सफल परिक्षण के बाद 2008 में ही भारत सरकार ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए भी approval दे दिया था, जिसके बाद इस मिशन पर काम शुरू हो गया।

इस मिशन के लिए 2007 में India ने Russia की Space Agency ROSCOSMOS के साथ deal की थी, इस डील में ROSCOSMOS Space Agency को इस मिशन के लिए Payload Lander बनाना था। 2009 में चंद्रयान-2  का डिजाइन तैयार हुआ और जनवरी 2013 को इस मिशन की Launching Fix कर दी गई। मगर कुछ न कुछ वजह से ROSCOSMOS Payload Lander बनाने में देर करता रहा, जिससे चंद्रयान-2 की  Landing Date Postponed होती गई। 2016 में तो Russia ने इंडिया के इस मिशन के लिए Payload Lander बनाने से मना कर दिया, जिसके बाद इसरो ने Decision ले लिया कि इस मिशन में इस्तेमाल होने वाले सभी Products इंडिया से ही बनेगें। फिर चंद्रयान-2 पूरी तरह से स्वदेशी मिशन बन गया। चंद्रयान-2 तीन  Parts में बने- Lander, Rover & Orbiter. इसमें से Rover और Orbiter पहले से ही देश में बन रहा था और अब स्वदेशी Lander ‘Vikram’ भी देश में बना।

बजट की नजर से भी है खास

इस मिशन के पूरे बजट का अमाउंट करीब 978 करोड़ रुपये था, जो कि दुनिया के सभी देशों के Moon Mission से बहुत ज्यादा सस्ता है। अमेरिका के 2014 के मून मिशन LDEE का टोटल बजट 1919 करोड़ था, जो कि इंडिया के मून मिशन के बजट से करीब दो गुना है। चाइना के Moon Mission ‘Chang’e -4 (चांग-4)’ का टोटल बजट 5759 करोड़ था, ये तो इंडिया के मून बजट से करीब करीब 5 गुना ज्यादा है। Russia के 1996 के मून मिशन की कीमत आज के हिसाब से देखे जाएं तो करीब 13,712 करोड़ होगी जो हमारे चंद्रयान-2 के बजट से बहुत ही ज्यादा है।

और तो और कई Hollywood Movies के बजट से भी कम इस मिशन का बजट रहा। Avengers End Game Movie का बजट करीब 2443 करोड़ था, जो इस मिशन के बजट से करीब 2.5 गुना ज्यादा है। यहां तक कि Avenger Series के सभी Movies का बजट इस मिशन से ज्यादा था और Hollywood Movies में Pirates of the Caribbean Series के भी कई मूवीज के बजट इस मिशन से ज्यादा थे।

ऐसे है खास

Famous Scientist Nikola Tesla जो दूरदर्शी Invention के लिए जाने जाते हैं उनका कहना था कि- The sun is the past, the earth is the present, and the moon is the future.

MISSIONMOON

और इसी Future की संभावनाओं की तलाश में हमारा देश लगातार चंद्रमा पर Research कर रहा है। ISRO ने भारत का पहला चंद्रयान 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रमा में भेजा और पहली बार में चंद्रमा में Successful Landing करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। 14 नंवबर 2008 को चंद्रयान चांद की सतह पर उतरा और वहां इंडिया का झंडा लगा।

चंद्रयान काफी सफल रहा और फिर चंद्रयान-2 पर विचार होने लगा। 22 जुलाई 2019 को सबसे Powerful ‘JSLV’ Mark-3 rocket जिसको ‘बाहुबली नाम दिया गया था, उसके जरिए इस मिशन का प्रक्षेपण हुआ। चंद्रयान-2 मिशन हमारे लिए कई मायनों में खास था। इस मिशन के तहत इंडिया moon के south pole पर soft landing  करने वाला था। इससे पहले सिर्फ तीन Countries America, China & Russia ही Moon पर Soft Landing कर पाएं हैं। मगर अभी तक किसी भी देश का Orbit Moon के South Pole पर Land नहीं हुआ है। अगर हमारा देश ऐसा कर पाता, तो वो दुनिया का पहला देश होता।

South pole पर soft landing होने से 2.1 km पहले ही चंद्रयान-2 के lander ‘Vikram’  का ISRO के Earth Center से कनेक्शन टूट गया। चंद्रयान-2 के Lander का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम दिया गया है। विक्रम Lander ISRO के Earth Center, Rover और Orbiter से Communicate कर सकता था। फिलहाल विक्रम से संपर्क साधने की पूरी कोशिश की जा रही है और कुछ अच्छे संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

लगभग सभी देशों ने चखी है असफलता

CHANDRAYANMISSION

अमेरिका, Russia जैसे कई देशों के Moon Mission कई बार फेल हुए है। America ने 1958- 1972 तक में 31 Moon Mission बनाया था, जिसमें से 17 मिशन फेल हो गए थे। Russia ने 1958-1976 तक में 33 Moon Mission भेजे थे, जिसमें से 26 मिशन फेल हो गए थे। यहां तक कि इजरायल का Moon Mission Landing होने से 10 km पहले क्रैश हो गया।

इसलिए Failure तो हमारे जिंदंगी में होते ही रहते हैं, इससे हमें हार नहीं मानना चाहिए बल्कि नए तरीकों की खोजना चाहिए।

By Sonam