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आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट (Amrapali housing project) : सफलता, विवाद और अब सुप्रीम कोर्ट की फटकार


मान लीजिए आपने लोन लेकर किसी फ्लैट को खरीदा है और आप जल्द ही उस घर में जाने का तैयारी कर रहे हों?

मगर घर बनने से पहले ही आपको पता चलता है कि आपका घर बनाने वाले बिल्डर्स भाग गए।

आपको कैसा लगेगा?

लगेगा मानों सारे सपने बिखर गए, पैसे डूब गए।

ठीक ऐसा ही आम्रपाली प्रोजेक्ट में हुआ है और इस प्रोजेक्ट के तहत घर खरीदने वाले हजारों लोगों के सपनों टूट गए। आम्रपाली के हाउसिंग प्रोजेक्ट का प्रचार इस तरह हुआ कि हर कोई इस प्रोजेक्ट के तहत घर खरीदना चाहता था।

कोई लोन पर तो कोई खुद के पैसे पर..

अचानक आम्रपाली ग्रुप ने बिल्डिंग कंस्ट्रन्शन बंद कर दिया और लोग परेशान होने लगे।

23 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला दिया कि आम्रपाली के नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधूरे प्रोजेक्ट को NBCC (National Building Construction Corporation Limited) पूरा करेगी। इस फैसले के बाद 42 हजार होमबॉयर्स ने राहत की सांस ली।  इसके साथ साथ सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली का RERA (Real Estate Regulatory Authority) के तहत किए गए रजिस्ट्रेशन को भी रद्द कर दिया है।

तो चलिए हम आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट के मामले को समझ लेते हैं..

आम्रपाली ग्रुप ने 2009 से कई शहरों में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की शुरूआत की, इन शहरों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा भी शामिल है। ये ग्रुप फ्लैट की रकम में से 10% अमाउंट पर फ्लैट बुकिंग की सुविधा प्रोवाइड कर रहा था। साथ ही 3 साल में फ्लैट प्रोवाइड करने की बात कर रहा था। 

मगर ऐसा नहीं हुआ..

इस पूरे मामले में Anil Sharma नाम सामने आता है, पहले इनके बारे में जान लेते हैं। 

अनिल शर्मा का जन्म बिहार के पंडारक गांव  में हुआ, उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से एमटेक की डिग्री हासिल की। 2002 में उन्होंने अपना पहला प्रोजेक्ट Amrapali Exotica किया और ये प्रोजेक्ट बिल्कुल सही टाइम पर और काफी अच्छा रहा। जिसके बाद आम्रपाली और मिस्टर शर्मा का नाम NCR में चल पड़ा। इस प्रोजेक्ट के बाद आम्रपाली को कई प्रोजेक्ट्स आम्रपाली सैफायर, आम्रपाली प्लेटिनम जैसे कई बड़े शहरों में मिले। इसके बाद तो मिस्टर शर्मा रियल स्टेट के कई सेक्टर्स, FMCG और फिल्म मेकिंग में काम करने लगे।  

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डोनाल्ड ट्रंप का फैन बताने वाला खुद ही ट्रंप के रास्ते पर चल पड़ा

अनिल शर्मा खुद को डोनाल्ड ट्रंप का फैन मानते है और आगे उन्हीं के रास्तों पर चले। वे भी रियल स्टेट से राजनीति में उतर आएं। 2012 में राज्यसभा का चुनाव लड़े, पर हार गए। इसके बाद फिर 2014 में नीतीश की पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़े, मगर फिर हार गए।

इसी दौरान उन पर बालिका विद्यापीठ लखीसराय के सचिव की हत्या का आरोप लगा और फिर उन्होंने आम्रपाली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट्स को बीच में ही बंद कर दिया और वो अंडर ग्राउंड हो गए ।

भरोसे की नींव टूटी

भरोसे की नींव से दुनिया चलती है ,हम भी जब किसी कंपनी में इनवेस्ट करने जाते है सबसे पहले उसमें भरोसा देखते हैं।

बिल्डर्स के इस तरीके से बिल्डिंग प्रोजेक्ट को बीच में छोड़ने की वजह से आम्रपाली प्रोजेक्ट्स से लोगों का भरोसा टूटने लगा।  

कंपनी की हेराफेरी

ये हाउसिंग प्रोजेक्ट्स हेराफेरी करने लगा। दरअसल इस कंपनी ने बिल्डिंग बनाने के लिए होम बायर्स से लिए गए 2000 करोड़ से ज्यादा के एडवांस अमाउंट को बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स पर लगाने के बजाय दूसरे किसी प्रोजेक्ट पर लगा दिया। फिर इस धोखाधड़ी की वजह से कंपनी पर मनी लॉड्रिंग का केस दर्ज हुआ। 

सेलिब्रिटी कनेक्शन

शुरू में इंडियन क्रिक्रेट टीम के पूर्व कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी इस हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के ब्रांड अंबेसडर थे। इसी वजह से 2016 में धोनी को भी फ्लैट खरीददारों के गुस्से का सामना करना पड़ा था। आम्रपाली ग्रुप के तमाम बिल्डर प्रोजेक्ट्स को महेंद्र सिंह धोनी ने प्रोमोट किया था और बाद में मिस्टर धोनी के साथ भी इस प्रोजेक्टस में फ्रॉड हुआ। विज्ञापन में दिए जाने वाले 150 करोड़ रुपये मिस्टर धोनी को नहीं मिला था। धोनी के नाम से भी कई लोगों ने इस प्रोजेक्ट्स में फ्लैट खरीदे थे। 2016 में मिस्टर धोनी के नाम से #amarapaliMisuseDhoni Hashtag खूब फेमस हुआ। बाद में महेंद्र सिंह धोनी ने इस हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के बिल्डर्स पर 150 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।

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विवाद और बढ़ता विवाद

आम्रपाली का ही एक सफायर प्रोजेक्ट था। जिसका काम 2009 से शुरू हुआ और 2016 आते आते लगभग हजार परिवार रहने लगे। लेकिन उनके अपार्टमेंट में अभी तक जरूरी चीजें जैसे- बिजली, पानी का काम भी पूरा नहीं हुआ था। इसके बाद जुलाई 2017 में ग्रेटर नोएडा में बिल्डर्स के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया। हर अखबार, न्यूजचैनल की हेडलाइन आम्रपाली से जुड़ने लगी।

लोग 8 साल से घर मिलने का इंतजार कर रहे थे, पर जब उन्हें फ्लैट मिला भी तो आधे-अधूरे काम के साथ।

जुलाई 2017 के आखिर में आम्रपाली के CEO Ritik Sinha जो कि आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा के दामाद हैं उन्हें और Director Nishant Mukul को अरेस्ट कर लिया गया। पर उन्हें 24 घंटे के बाद रिहा कर दिया गया । दरअसल कंपनी ने लेबर वेलफेयर सेस का करीब 4 करोड़ 29 लाख रुपया जमा नहीं कर रही थी। लेबर वेलफेयर सेस, बड़े अमाउंट के प्रोजेक्ट पर लगता है इसमें एक तय रकम के लिए बिल्डर्स को प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का 1% रकम देना होता है। लेबर वेलफेयर सेस जमा करने के बाद इन्हें छोड़ दिया गया।

आग के जैसा फैलने लगा विवाद

आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्राइवेट लिमिटेड को दिवालिया कर अपने पैसे वसूलने के लिए अगस्त 2017 तक बैंक ऑफ बड़ौदा और क्वांटम प्रोजेक्ट्स- इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड NCLT(National Company Law Tribunal) पहुंच गई ।

इसके बाद तो होम बॉयर्स के हाथ पांव फूलने लगे, क्योंकि उस समय Bankrupty के नियमों के अनुसार दिवालिया घोषित होने पर होम बॉयर्स को कुछ नहीं मिलता।

सिंतबर 2017 में फ्लैट के खरीददारों ने NCLT में डाले गए इस याचिका के विरोध में याचिका डाली गई।  

22 फरवरी 2018 को केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली से फ्लैट्स को वक्त पर काम पूरा करने को कहा, जिस पर आम्रपली ने पार्टनरशिप के साथ प्रोजेक्ट पूरा करने की अनुमति मांगी, जिस पर कोर्ट ने तीन डिपलपर्स कंपनियों- गैलेक्सी, कनैजिया ग्रुप और आईआईएफएल को मंजूरी दे दी गई।

इसके बाद कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के सभी 47 Residential Towers and Flats के खरीददारों से लिए गए अमाउंट और सभी इनवेस्टमेंट का पूरा ब्यौरा भी मांगा।

Homebuyers का होता रहा नुकसान

इस सबसे में अगर किसी का सबसे ज्यादा loss हो रहा था तो वे थे- होमबॉयर्स.

क्योंकि बुकिंग करने के बाद तीन साल में मिलने वाला फ्लैट उन्हें अभी तक नहीं मिला। और तो और फ्लैट बुक करने वाले कई होमबॉयर्स ने फ्लैट के 90% पैसे भी दे दिए थे।

17 मार्च 2018 को बिल्डर और बायर्स की ज्वाइंट टीम बनाई गई। जिसे आम्रपाली के सभी प्रोजेक्ट्स का वेरिफिकेशन करके 27 मार्च 2018 तक सुप्रीम कोर्ट में पेश करना था। सुनवाई चल ही रही थी कि 21 मार्च 2018 को बिजली विभाग ने आम्रपाली बिल्डर्स की नोएडा सेक्टर 74, 76 सोसाइटी के कनेक्शन काट दी, क्योंकि आम्रपाली के इस प्रोजेक्ट में बिजली विभाग का पांच करोड़ रुपये बकाया था ।

27 मार्च 2018 की सुनवाई में बैंक ऑफ बड़ौदा भी शामिल हुई, और उसने आम्रपाली के खिलाफ NCLT में याचिका दी।

2 मई 2018 को कोर्ट ने बिल्डर ग्रुप की किसी भी संपत्ति की बिक्री या ट्रांसफर पर रोक लगा दी। मई में ही पता चला कि आम्रपाली बिल्डर्स ने अपने रुके हुई प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के बजाय उसमें से 2700 करोड़ से ज्यादा का अमाउंट दूसरी किसी कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट ने आम्रपाली को 250 करोड़ रुपये फौरन सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया, पर कंपनी ने उन पैसे को कभी जमा नहीं किया।

उम्मीद की किरण

23 मई 2018 को केद्र सरकार ने दिवालिया को लेकर बहुत बड़ा बदलाव किया। जिससे किसी भी रियल स्टेट की कंपनी के दिवालिया होने पर बैंक की तरह ही होमबॉयर्स को भी पैसे मिलने जरूरी हो गए।

1 अगस्त 2018 को कोर्ट ने आम्रपाली के सभी 40 कंपनियों के इनवेस्टर्स के खातों को सील कर दिया और इनवेस्टर्स की प्राइवेट संपत्तियों को भी जब्त कर लिया गया और इस कंपनी के 2008 के बाद के सभी प्रोजेक्ट्स की जानकारी भी मांगी गई।

हजारों खरीददारों के करोड़ों रुपये हड़पने वाले बिल्डर्स और इस कंपनी के प्रमोटर्स को देश से बाहर जाने पर भी रोक लगा दी गई ।

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2 अगस्त 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी NBCC को दे दी। इस दौरान पता चला कि आम्रपाली कंपनी का पिछले लगभग 3 सालों ऑडिट नहीं हुआ था। आम्रपाली ग्रुप ने जो पैसा कस्टमर्स से लिया था उसे NBCC को देने का आदेश दिया गया।

उस समय तक आम्रपाली ग्रुप ने 42,000 फ्लैट बेच दिए थे, जिनमें से 25 हजार प्रोजेक्ट का काम बाकी था।

इस मामले में R.Venkatmani को कोर्ट रिसीवर अप्वाइंट किया गया है और उन्हें बकाया वसूलने का अधिकार भी दिया गया है और वे 3rd पार्टी के जरिए आम्रपाली की संपत्ति को बेच सकते हैं। आम्रपाली ग्रुप ने अपने 40 कंपनियों के अकाउंट्स में से सिर्फ 38 कंपनियों के अकाउंट्स का ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट को दिया है।  

NBCC अब इस प्रोजेक्ट के अधूरे काम को पूरा कर रही है और उम्मीद है जल्द ही लोगों को उनके सपनों का घर मिल जाए।

इस तरह और भी कई Financial Frauds हुए हैं, जिनमें से कुछ फ्रॉड्स को हमने अपने यूट्यूब चैनल में विस्तार से समझाया है।

By Sonam